bhaktamar stotra lyrics
बालं विहाय जल-संस्थित-मिन्दु-बिम्ब- Strīṇāṁ śatāni śataśō janayanti putrān, कस्ते क्षमः सुर-गुरु-प्रतिमोपि बुद्धया । वेगावतार-तरणातुर-योध-भीमे । Taccāmra-cāru-kalikā-nikaraika-hētu: ||6||, त्वत्संस्तवेन भव-सन्तति-सन्निबद्धम्, राजसम्मान-सौभाग्यवर्धक, चित्रं किमत्र यदि ते त्रिदशांगनाभि- Tvatsaṅkathā̕pi jagatāṁ duritāni hanti | तच्चाम्र-चारु-कलिका-निकरैक-हेतु: ||६|| भाषा-स्वभाव-परिणाम-गुणैः प्रयोज्यः ॥35॥ उद्यच्छशांक-शुचि-निर्झर-वारि-धार- बद्ध-क्रमः क्रम-गतं हरिणा-धिपोपि, संग्रहणी आदि उदर पीडा नाशक, गम्भीर-तार-रव-पूरित-दिग्वभाग- Surya Mantra Udyachchhashanka – shuchinirjhara – varidhara-,muchchaistatam sura gireriva shatakaumbham || 30 ||, Chhatratrayam tava vibhati shashankakanta-muchchaih sthitam sthagita bhanukara – pratapam | November 24, 2015 भक्तामर-स्तोत्र (संस्कृत) Bhaktamar Stotra (Sanskrit) admin Abhishek : Vidhi Nirdesh Digambar Jain Theerth Sathal – Rail Marg Shiv Tandav Stotra Bhavantareapi || 21 ||, Strinam shatani shatasho janayanti putrannanya sutam tvadupamam janani prasuta| आक्रामति क्रम-युगेण निरस्त-शंक- र्नीतं मनागपि मनो न विकार-मार्गम् | स्तोष्ये किलाहमपि तं प्रथमं जिनेन्द्रम् ॥2॥ Naivaṁ tathā hariharādiṣu nāyakēṣu | संतानकादि-कुसुमोत्कर-वृष्टिरुद्धा । माभाति रूपममलं भवतो नितान्तम् | Find Bhaktamar Stotra in Hindi, English, Sanskrit , भक्तामर स्तोत्र also know the meaning and you can free download pdf version or print it. || Iti śrīmānatungācārya-viracitam ādinātha-stōtram samāptam || Navagraha Mantra Image; Video 1; video 2; Image. मुक्ता-फल-प्रकर-जाल-विवृद्ध-शोभम्, कस्ते क्षमः सुर-गुरु-प्रतिमोपि बुद्धया । Padmākarēṣu jalajāni vikāsabhāñji ||9||, नात्यद्भुतं भुवन-भूषण भूत-नाथ! सर्व-विजय-दायक, निर्धूम-वर्त्ति-रपवर्जित-तैलपूरः, प्रेत बाधा निवारक, त्वामा-मनंति मुनयः परमं पुमांस- आचार्य श्री मानतुंग स्वामी Tasyāśu nāśamupayāti bhayaṁ bhiyēva, पुरुषोत्तमोसि ॥25॥ सर्वसिद्धिदायक, बुद्धया विनापि विबुधार्चित-पाद-पीठ, Kaścinmanō harati nātha! Shivamarga-vidhervidhanat ,vyaktam tvameva bhagavan ! चोर भय व अन्यभय निवारक, वक्त्रं क्व ते सुर-नरोरगनेत्र-हारि, Spaṣṭīkarōṣi sahasā yugapajjaganti | Muccaistaṭaṁ suragirēriva śātakaumbham ||30||, छत्र-त्रयं तव विभाति शशांककान्त- Tori Pooja Ko Phal Paayo, विद्यमान बीस तीर्थंकरों का अर्घ्य Vidyamaan Bis Tirthankaron Ka Arghya, अन्य वैकल्पिक पूजाएँ Anya Vaikalpik Poojayen, श्री देव-शास्त्र-गुरु पूजा(कविश्री युगलजी) Shri Dev Shastra Guru Pooja(KaviShri YugalJi), श्री आदिनाथ-जिन पूजा (चाँदखेड़ी) Shri Aadinaath Jin Pooja(Chandkhedi), श्री ऋषभदेव जिन पूजा (रानीला) Shri Rishabhdev Jin Pooja(Ranila), श्री पद्मप्रभ जिन पूजा (बाड़ा) Shri Padamprabhu Jin Pooja(Bada), श्री चंद्रप्रभ जिन पूजा (तिजारा) Shri Chandaprabhu Jin Pooja(Tijara), श्री नेमिनाथ जिन पूजा Shri Neminaath Jin Pooja, श्री पार्श्वनाथ-जिन पूजा(‘पुष्पेन्दु’) Shri Parshvanath Jin Pooja(‘Pushpendu’), श्री महावीर स्वामी पूजा (चाँदनगाँव) Shri Mahaveer Swami Pooja (Chandangaon), भजन : चाँदनपुर के महावीर Bhajan : Chandanpur Ke Mahaveer, श्री महावीर-जिन पूजन(भारिल्ल) Shri Mahaveer Jin Pooja(Bharil), श्री पंच-परमेष्ठी पूजा Shri Panchparmesthi Pooja, सिद्ध-पूजा (जुगलकिशोर) Siddh-Pooja (Jugalkishore), श्री बाहुबली स्वामी पूजा Shri Bahubali Swami Pooja, श्री जम्बू स्वामी पूजा Shri Jambu Swami Pooja, आचार्यप्रवर श्री कुंदकुंद स्वामी पूजन AacharyaPravar Shri Kundkund Swami Poojan, श्री पार्श्वनाथ जिन पूजन (बड़ागाँव) Shri Parshvanath Jin Poojan(Badagaon), देव-शास्त्र-गुरु पूजा (रवीन्द्रजी) Dev – Shashtra – Guru Pooja (Ravindra ji), श्री पार्श्वनाथ जिन पूजा (रवीन्द्रजी) Shri Parashavnath Jin Pooja (Ravindra ji), श्री अकम्पनाचार्यादि सप्त-शत मुनि पूजा Shri Akampnacharyadi Sapt-shat Muni Pooja, श्री विष्णुकुमार महामुनि पूजा Shri VishnuKumar Mahamuni Pooja, सोलहकारण-भावना पूजा Solahkaaran-Bhavna Pooja, श्री नंदीश्वर-द्वीप-पूजा Shri Nandishwar-Deep-Pooja, दशलक्षण-धर्म पूजा Dashlakshan-Dhram Pooja, स्वयंभूस्तोत्र-भाषा svayambhu Stotra-bhasha, अकृत्रिम-चैत्यालय-पूजन Akrtrim-Chetyalay-Poojan, श्री चौबीस तीर्थंकर निर्वाणक्षेत्र पूजा Shri Chaubis Tirthankar Nirvan Kshtra Pooja, पंच बालयति-तीर्थंकर पूजा Panch Baalyati-Tirthankar Pooja, निर्वाण क्षेत्र बड़ी पूजा Nirvaan Kshetra Badi Pooja, श्री ऋषिमंडल पूजा (हिंदी) Shri RishiMandal Pooja(Hindi), नवग्रह-अरिष्ट-निवारक विधान पूजन Navgrah-Arista-Nivarak Vidhaan, अथ नवग्रह-शांति स्तोत्रम् (संस्कृत) Ath Navgrah Shanti Stotram(Sanskrit), नवग्रह-शांति-स्तोत्र (हिंदी) Navgrah Shanti Stotra(Hindi), श्री कलिकुंड-पार्श्वनाथ-जिन पूजा Shri Kalikund-Parshvanath -Jin Pooja, श्री अहिच्छत्र-पार्श्वनाथ-जिन पूजा Shri Ahichchatra-Parshvanath -Jin Pooja, श्री वीर-निर्वाणोत्सव : दीपावली-पूजन Shri Veer-Nirvanotsav : Dipawali-Poojan, नर्इ बहियों के मुहूर्त की विधि Nai Bahiyo Ke muhrat Ki Vidhi, गौतम स्वामी जी का अर्घ्य Gautam Swami Ji Ka Argh, अंतराय-नाशार्थ अर्घ्य Antraya-Nasharth Argh, शांति पाठ (संस्कृत) एवं अथ इष्ट प्राथना Shanti Paath (Sanskrit) evam Ath Isht Prathana, विसर्जन – पाठ (संस्कृत) Visarjan – Paath (Sanskrit), विसर्जन-पाठ (हिन्दी) Visarjan – Paath (Hindi), श्री गौतम-गणधरदेव 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Kalyanmandir Stotra(Hindi), एकीभाव-स्तोत्र (भाषानुवाद) Ekibhav Stotra (Bhashanuwaad), विषापहार स्तोत्र (हिंदी अनुवाद) Vishaphaar Stotra (Hindi Anuwaad), भूपाल चतुर्विंशतिका (हिन्दी) Bhupal Chaturvinshatika (Hindi), रत्नाकर पंचविंशतिका Ratanakar Panchvinshtika, पाठ व स्तुति संग्रह Paath v Stuti Sangrah, सामायिक पाठ : नित देव! कल्पांत-काल-मरुता चलिता चलेन यत्ते समान-मपरं न हि रूपमस्ति ॥12॥ मारभ्यते तनु-धियापि तव प्रभावात् | पद्माकरेषु जलजानि विकास-भांजि ॥9॥ Ramraksha Stotra According to Hindu Mythology chanting of Bhaktamar Stotra regularly is the most powerful way to please Bhaktamar and get his blessing. Krud’dha nr̥pati dvārā ācārya mānatuṅga kō balapūrvaka pakaṛavā kara 48 tālōṁ kē andara banda karavā diyā gayā thā. लोकत्रये द्युतिमतां द्युतिमाक्षिपन्ति | मर्याna भवन्ति मकरध्वज-तुल्यरूपा: ||४५|| bhaktamar stotra sanskrit pdf free download. त्वामेव सम्य-गुपलभ्य जयंति मृत्युं, तावंत एव खलु तेप्यणवः पृथिव्यां, स्त्वं संश्रितो निरवकाश-तया मुनीश । पापं क्षणात्क्षय-मुपैति शरीर-भाजाम् । Kiṁ śarvarīṣu śaśinā̕ahnī vivasvatā vā, Yadvāsarē bhavati pāṇḍu-palāśa-kalpam ||13||, सम्पूर्ण-मंडल-शशांक-कला-कलाप- लोकत्रये द्युतिमतां द्युतिमा-क्षिपंती । नैवं तथा हरि-हरादिषु नायकेषु । पर्युल्लसन्नख-मयूख-शिखाभिरामौ | कश्चिन्मनो हरति नाथ! पुरुषोत्तमोसि ॥25॥ चेतो हरिष्यति सतां नलिनी-दलेषु, Strailōkya-lōka-śubha-sangamabhūtidakṣa: | जैन साईट ( भाग्यधाम चेरिटेबल ट्रस्ट ) ( www.Jainsite.com ) द्वारा स्त्रैलोक्य-लोक-शुभ-संगम-भूति-दक्षः । सूर्यांशु-भिन्न-मिव शार्वर-मन्धकारम्॥7॥ Yē sanśritāstrijagadīśvara-nāthamēkam, उद्यद्-दिवाकर-मयूख-शिखा-पविद्धं, राजसम्मान-सौभाग्यवर्धक, चित्रं किमत्र यदि ते त्रिदशांगनाभि- मादित्य-वर्ण-ममलं तमसः पुरस्तात् गन्धोद-बिन्दु-शुभ-मन्द-मरुत्प्रपाता, Divya-dhvanirbhavati tē viśadārtha-sarva- क्रोधोद्धतं फणिन-मुत्फण-मापतंतम् । सर्वभय निवारक, आस्तां तव स्तवन-मस्त-समस्त-दोषं, Gorakhnath Mantra सर्व कार्य सिद्धि दायक, उच्चैर-शोक-तरु-संश्रित-मुन्मयूख- Bhūtyāśritaṁ ya iha nātmasamaṁ karōti ||10||, दृष्ट्वा भवन्तमनिमेष-विलोकनीयम्, स्पष्टीकरोषि सहसा युगपज्जगन्ति | Siddha Kunjika Stotra Kalpanta – kal – pavanoddhata – nakrachakramko va taritumalamambunidhim bhujabhyam || 4 |, Soaham tathapi tava bhakti vashanmunishakartum stavam vigatashaktirapi pravrittah | सर्वा दिशो दधति भानि सहस्त्र-रश्मिं, कारागार आदि बन्धन विनाशक, आपाद-कण्ठ-मुरुशृंखल-वेष्टितांगा, Bhaktamar Stotra 45 – For curing incurable & threatful disease like cancer. Gamyō na jātu marutāṁ calitācalānām, इच्छित-आकर्षक, दृष्ट्वा भवंत-मनिमेष-विलोकनीयं, Tungōdayādri-śirasīva sahasra-raśmē: ||29||, कुन्दावदात-चल-चामर-चारु-शोभम्, Learn how your comment data is processed. मत्त-भ्रमद्-भ्रमर-नाद-विवृद्ध-कोपम् | कस्तान्निवारयति संचरतो यथेष्टम ॥14॥ योगीश्वरं विदित-योग-मनेक-मेकं, रंगत्तरंग-शिखर-स्थित-यान-पात्रास्- Dhanvantri Mantra संतान-लक्ष्मी-सौभाग्य-विजय बुद्धिदायक, ज्ञानं यथा त्वयि विभाति कृतावकाशं सर्व विघ्न उपद्रवनाशक, भक्तामर-प्रणत-मौलि-मणि-प्रभाणा- व्यक्तं त्वमेव भगवन्! तेजःस्फुरन्मणिषु याति यथा महत्वं, धत्ते जनो य इह कण्ठ-गतामजस्रम्, त्वन्नाम-नाग-दमनी हृदि यस्य पुंस ॥41॥ Tags bhaktamar stotra hindi mein lyrics, bhaktamar stotra mahima. धत्ते जनो य इह कण्ठ-गतामजसं शत्रु तथा शिरपीडा नाशक, यःसंस्तुतः सकल-वांग्मय-तत्त्वबोधा- सर्व ज्वर नाशक, मन्दार-सुन्दर-नमेरु-सुपारिजात जादू-टोना-प्रभाव नाशक, किं शर्वरीषु शशिनान्हि विवस्वता वा, भूतैर्गुणैर्भुवि भवंत-मभिष्टु-वंतः । पादौ पदानि तव यत्र जिनेन्द्र धत्तः, किं मन्दराद्रि-शिखरं चलितं कदाचित् ॥15॥ गन्धोद-बिन्दु-शुभ-मन्द-मरुत्प्रपाता, Trāsaṁ vihāya bhavata: Smaraṇād vrajanti ||44||, उद्भूत-भीषण-जलोदर-भार-भुग्ना:, Tvatsanstavēna bhava-santati-sannibad’dham. भूतैर्गुणैर्भुवि भवंत-मभिष्टु-वंतः । विद्योतयज्-जगदपूर्व-शशांक-विम्बम् ॥18॥ विभाजते तव वपुः कानका-वदातम । संग्राम-वारिधि-महोदर-बन्धनोत्थम् । स्वप्नांतरेपि न कदाचिद-पीक्षितोसि ॥27।। सर्वभय निवारक, आस्तां तव स्तवन-मस्त-समस्त-दोषं, Divyadhvanirbhavati te vishadarthasatvabhashasvabhava – parinamagunaih prayojyah || 35 ||, Unnidrahema – navapankaja – punjakanti,paryullasannakhamayukha-shikhabhiramau | Cētō hariṣyati satāṁ nalinī-dalēṣu,

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